मन की बात: पीएम मोदी ने स्वदेशी, जल संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत पर दिया बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देशवासियों को कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही नागरिकों का आभार जताते हुए कहा कि लोगों ने उनकी अपील का सम्मान करते हुए विदेशी उत्पादों और अनावश्यक खरीदारी से बचने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं।
आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियों का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में भारत ने रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और अन्य रक्षा परियोजनाएं पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार की गई हैं। इसके अलावा डीआरडीओ द्वारा लंबी दूरी की स्वदेशी क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण और भारत में निर्मित C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की पहली उड़ान को देश की बड़ी उपलब्धि बताया।
नालंदा की शास्त्रार्थ परंपरा का किया जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शास्त्रार्थ की परंपरा को फिर से शुरू किया गया है, जो भारतीय बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

मेघालय के रूट ब्रिज और महिलाओं की पहल की सराहना
प्रधानमंत्री ने मेघालय के प्रसिद्ध लिविंग रूट ब्रिज का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रकृति और मानव की साझेदारी का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग 120 से अधिक रूट ब्रिजों का संरक्षण कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने पूर्वोत्तर की महिलाओं की उस पहल की भी प्रशंसा की, जो एक समय अशुभ माने जाने वाले पक्षी के संरक्षण में जुटी हैं।
प्लास्टिक से पेड़ बनाने वाली महिलाओं को सराहा
पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र की महिलाओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि महिलाओं ने प्लास्टिक कचरे का पुनः उपयोग कर सजावटी पेड़ तैयार किए हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छता का संदेश भी दिया जा रहा है। उन्होंने गणेश चतुर्थी पर मिट्टी की मूर्तियां खरीदने और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों से बचने की अपील भी की।
जल संरक्षण और वैज्ञानिक सोच पर जोर
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने लोगों से वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बारिश की हर बूंद को बचाना जरूरी है ताकि भूजल स्तर बेहतर हो सके। साथ ही उन्होंने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक सोच अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का भी आह्वान किया।